Dussehra Ki Kahani | दशहरा की कहानी
दृश्य सूची
परिवार का परिचय
एक समय की बात है, जब गांव में एक परिवार रहता था। जिसमें माता-पिता के साथ दो छोटे बच्चे मिक्की, पिंकी और उनकी बड़ी बेटी अलका रहती थी। मिक्की थोड़ा शरारती स्वभाव का था। पिंकी और मिक्की छोटी-छोटी बातों पर आपस में झगड़ते रहते थे। अलका उन्हें समझाती थी, कि लड़ाई करना बहुत गलत बात है, लेकिन दोनों अपनी आदतों से बाज नहीं आते थे।
दशहरे का त्यौहार और लड़ाई
दो दिन बाद ही दशहरे का त्यौहार था। अलका और मम्मी ने मिलकर जलेबियां बनाई। अलका ने जलेबियां मिक्की और पिंकी को खाने के लिए दी। अब जैसे ही मिक्की की जलेबी खत्म हुई उसने पिंकी की प्लेट से जलेबी उठा कर खा ली। फिर दोनों आपस में लड़ने लगे। अलका ने दोनों को डांट लगाते हुए कहा, “आज दशहरा है कम से कम आज तो लड़ाई मत करो। मिक्की ने अलका से पूछा, “दीदी दशहरे को मिठाई बनाते है, पूजा करते है और क्या क्या होता है आज के दिन?” अलका ने बताया, “मिक्की और पिंकी आज के दिन हम रावण दहन भी करते है। आज के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी। अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है दशहरा।” आज शाम को गांव में भी रावण का पुतला जलाया जायेगा। दोनों बच्चें अलका को ध्यान से सुन रहे थे। पिंकी ने कहा, ” दीदी आपकी बातें सुनकर तो मजा आ रहा है। प्लीज हमें कहानी सुना दो, दशहरा की।” अलका ने कहा, “पहले तुम दोनों एक दूसरे को सॉरी बोलो और प्रॉमिस करो कि आगे से लड़ाई नहीं करोगे। मिक्की और पिंकी ने अलका की बात मान ली और कहानी सुनने लगे।
वनवास पर चले प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण
अलका ने बताया कि यह कहानी त्रेता युग की है। राजा दशरथ को कैकेयी के वचन में बंधकर राम जी को चौदह वर्ष का वनवास देना पड़ा। पिंकी ने पूछा, इसका मतलब क्या हुआ दीदी? यानी की अयोध्या को छोड़कर राम जी, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन चले गए। वहाँ वन में उन्होंने एक सुंदर कुटिया बनाई और खुशी से रहने लगे। शूर्पणखा नाम की एक राक्षसी राम और लक्ष्मण जी के सौंदर्य को देख मोहित हो गई। उसने एक सुंदर कन्या का भेष धारण किया और राम जी के आगे शादी का प्रस्ताव रखा। उन्होंने उसका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। फिर शूर्पणखा ने लक्ष्मण जी को कहा, “हे तेजस्वी पुरुष में तुम्हें पसंद करती हूं, तुम मुझसे विवाह कर लो।” लक्ष्मण जी के मना करने पर भी वह अपनी चिकनी चुपड़ी बातो में लक्ष्मण जी को फ़साने लगी। लक्ष्मण जी को क्रोध आ गया और उन्होंने शूर्पणखा की नाक काट दी और वह अपने असली राक्षसी रूप में आ गई।
वह रोती और चिल्लाती हुई अपने भाई लंका के राजा रावण के पास गई। रावण ने शूर्पणखा को इस हाल में देख पूछा, “किसकी इतनी हिम्मत जिसने लंकेश की बहन की ये हालत की। मैं अभी उसका वध कर दूंगा।” शूर्पणखा ने रावण को भड़काया की जिस तरह उन्होंने एक स्त्री का अपमान किया है ठीक उसकी तरह आपको भी प्रतिशोध लेना पड़ेगा। रावण ने कहा, “तुम कहना क्या चाहती हो?” भैया, राम और लक्ष्मण दो सुंदर युवक हैं और उनके साथ एक परम सुंदरी स्त्री भी है, जिसका नाम सीता है। वह राम की पत्नी है। आप उसका हरण कर लो। रावण ने उसकी बात मान ली और एक मायावी जाल बुना।
सुनहरा हिरण और माता सीता का हरण
मारीच नाम का एक राक्षस सोने का हिरण बनकर वन में गया। उस पर माता सीता की नजर पड़ी। उन्होंने राम जी से उपहार स्वरूप उस हिरण को माँगा। राम जी हिरण का पीछा करते हुए काफी दूर निकल गए। जैसे ही तीर हिरण को लगा वह घायल होकर गिर गया और अपने राक्षस रूप में आ गया। उसने राम जी की नकली आवाज निकाल कर माता सीता और लक्ष्मण को भ्रमित किया। लक्ष्मण जी, लक्ष्मण रेखा खींच कर राम जी को देखने निकल पड़े। उधर रावण साधु का रूप धारण कर माता सीता से भिक्षा मांगने लगा। जैसे ही माता सीता ने लक्ष्मण रेखा पार करके भिक्षा दी, वह अपने असली रूप में आया और माता सीता का हरण करके लंका ले गया। जब राम और लक्ष्मण वापिस आए तो उन्हें सीता कही नही दिखाई दी। दोनों भाई माता सीता को ढूंढने निकल पड़े।
माता सीता की खोज और रावण का अंत
माता सीता को खोजते-खोजते उनकी मित्रता सुग्रीव, हनुमान, जामवंत, विभीषण आदि योद्धाओं से हुई। उन्होंने एक वानर सेना तैयार की। जब उन्हें पता चला कि माता सीता समुद्र पार लंका में है, तो राम नाम के पत्थरों से नल और नील के द्वारा एक पुल का निर्माण किया गया ताकि लंका पहुंच सके। पिंकी बोली, “राम नाम के पत्थर कैसे दीदी?” अलका ने बताया, “सभी पत्थरों पर राम लिखा और वो तैरने लगे। इस तरह राम सेतु का निर्माण कर पूरी सेना लंका पहुँची ।” युद्ध में पहले राम जी ने कुंभकरण का वध किया। फिर लक्ष्मण जी ने मेघनाद का भी वध कर दिया। अंत में राम जी और रावण के बीच युद्ध आरंभ हुआ। रावण अपनी मायावी शक्तियों का इस्तेमाल करने लगा। राम जी ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया लेकिन वह तब भी नहीं मारा। उसका सर वापस आकर जुड़ गया और देखते ही देखते उसके दस सिर जुड़ गए।
मिक्की हैरान होकर बोला, “तो फिर रावण मरा कैसे?”। अलका ने बताया कि रावण के भाई विभीषण ने राम जी को बताया, “प्रभु, रावण की नाभि पर निशाना साधिये तभी उसका वध होगा।” राम जी समझ गए, उन्होंने अपने धनुष पर बाण चढ़ाया और सीधा उसकी नाभि पर निशाना लगाया। नाभि पर बाण लगते ही रावण जमीन पर गिर गया और मर गया। इस तरह प्रभु श्री राम ने रावण को पराजित कर दिया। बस तभी से दशहरे का त्यौहार मनाया जाने लगा। पिंकी और मिक्की को महसूस हुआ की दशहरा सिर्फ शोभायात्रा, पुतला जलाना और उनकी पसंदीदा मिठाई के बारे में नहीं है बल्कि यह सिखाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली हो लेकिन जीत हमेशा सच्चाई और अच्छाई की होती है।
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